आटिस्म में व्यवहार की परेशानियां

बच्चों का व्यवहार

व्यवहार के अच्छा होने से बच्चों को औरों के साथ रहने और सीखने में आसानी होती है।

जिन बच्चों को आटिस्म है उनके व्यवहार में अक्सर परेशानियां होती हैं। इन परेशानियां के कम होने से इनकी देखभाल और पढाई में आसानी होती है।

बच्चे के व्यवहार को अच्छा बनाने में सिर्फ बच्चे का ही नहीं, उसके परिवार और शिक्षकों का बड़ा योगदान होता है। कुछ बातों को जानने, सीखने और अभ्यास करने से माता-पिता और शिक्षकों को बच्चे के व्यवहार को अच्छा करने में मदद मिलती है।

बच्चों के व्यवहार में परेशानी क्यों होती हैं और यह परेशानियाँ आटिस्म मैं ज़्यादा क्यों होती हैं?

कुछ बातें सब बच्चों के व्यवहार पर लागू होती हैं:

  • बच्चे चाहते हैं कि सभी उन की ओर ध्यान दें और उनकी इच्छा तुरंत पूरी करें। अगर किसी वजह से ऐसा नहीं होता तो बच्चे गलत बर्ताव के ज़रिये अपनी इच्छा पूरी कराने की कोशिश करते हैं।
  • हर बच्चे में, बहुत बचपन से, औरों का ध्यान अपनी ओर खींचने की इच्छा होती है। औरों का उन की तरफ गुस्सा होना भी उन के लिए ध्यान मिलना होता है।
  • गलत व्यवहार दिखा कर औरों से अपनी बात मनाना: ऐसे समय पर माता-पिता अक्सर, बच्चे को शांत करने के लिए, उस की बात मान लेते हैं। इस में कोई आश्चर्य नहीं की इस से बच्चा अपनी बात मनाने के इस तरीके को सीख लेता है।
  • बच्चे औरों की परेशानी, सोच या परिसथिति और सही-गलत को ठीक से नहीं समझ पाते; इस लिए उनके स्थिति के अनुकूल व्यवहार ना करने की सम्भावना ज्यादा होती हैं।
  • बच्चों का अपनी भावनाओं और व्यवहार पर नियंत्रण कमज़ोर होता है। उन्हें गुस्सा ज़ल्दी और ज़्यादा आता है।
  • किसी गलत व्यवहार पर औरों का गलत ध्यान मिलने से (उसके व्यवहार पर हँसना, बच्चे से गुस्सा करना, उस पर चिल्लाना या उसे मारना) या गलत प्रतिक्रिया मिलने से (जैसे बच्चे के गलत व्यवहार दिखाने पर उसकी इच्छा पूरी कर देना) बच्चे उस गलत बर्ताव को दोहराते हैं।

जिन बच्चों को आटिस्म है उनके व्यवहार की परेशानियां निम्नलिखित वजहों  से ज़्यादा होती हैं:

  • आटिस्म की वजह से दूसरों की सोच, इच्छा और परिस्थिति को समझने की क्षमता बहुत कम होती है। इस अड़चन से बच्चे परेशान हो जाते हैं, सही प्रतिक्रिया नहीं दिखा पाते और उन का व्यवहार बिगड़ता है।
  • औटिस्म में संचार की कमी होने से बच्चे अपनी ज़रूरत, इच्छा और भावना नहीं कह पाते। उन को कुंठा और निराशा होती है। अगर हम उन के व्यवहार को शब्दों में बदल दें तो वह शायद कुछ ऐसा जताने की कोशिश कर रहे हों :
    • “मैं परेशान हूँ और —यहाँ से बाहर जाना/ यह काम और ना करना/ अकेला होना — चाहता हूँ”
    • “मैं इस काम से ऊब गया हूँ” या “मुझे नहीं मालूम अब क्या करना है”
    • “इस आवाज़/शोर से मुझे परेशानी हो रही है”
    • “मुझे भूख/प्यास लगी है” या “मेरे सिर/पेट में दर्द है”
    • “मेरे सामान को उसकी जगह से मत हटाओ, मुझे परेशानी होती है”
  • संवेदनशीलता के बहुत बढ़ा होने से कुछ आवाज़ों/जगह/ रौशनी/सम्पर्क से इन बच्चों को बहुत परेशानी होती है। परेशान बच्चे का व्यवहार खराब होता है।
  • अपनी भावनाओं और व्यवहार पर इनका नियंत्रण बहुत कमज़ोर होता है – छोटी सी परेशानी तेजी से बहुत बड़ी हो जातो है। इस से व्यवहार जल्दी और ज्यादा खराब होता है।
  • आत्म-केन्द्रित होने की वजह से औरों में रुचि, पारस्परिक समझ और व्यवहार में कमी होती है। औरों की निजी जगह का ख्याल रखने और सही सामाजिक व्यवहार की समझ भी कम होती है।
  • अपने विचार या काम को बदले में परेशानी होती है। इस लिए काम बदलने या कोई नया काम करने के अनुदेश मानने में दिक्कत होती है।
  • आटिस्म में बच्चों को मानसिक चिंता ज़्यादा होती है, इस से वह परेशान हो जाते हैं और उनका व्यवहार बिगड़ता है।

और बच्चों की तरह, जिन बच्चों को आटिस्म है उन के हर बर्ताव का भी कोई कारण होता है; उनके बर्ताव के पीछे होने वाले कारण आइसबर्ग के छुपे हुए हिस्से की तरह छुपे होते हैं – इन्हें बच्चे को और उसकी स्थिति को ध्यान से देख कर समझना पड़ता है।  बच्चों के व्यवहार के पीछे छुपे कारण उनके गलत व्यवहार की वजह हैं लेकिन उस व्यवहार को करने का बहाना नहीं हैं। सही प्रयत्न करने से इनका व्यवहार भी सही हो सकता है।  


बच्चे के व्यवहार की परेशानियों का समाधान करना

इसके लिए पांच कदम लेना ज़रूरी है:

  1. व्यवहार मैं ख़राबी पैदा करने वाली स्थितियों को कम करना
  2. बच्चे से अपने पारस्परिक संबंधों को मज़बूत करना
  3. बच्चा जो सही व्यवहार करता हो उन को बढ़ाना
  4. नये सही व्यवहार सिखाना
  5. गलत व्यवहार कम करना

 सिर्फ बच्चे के गलत व्यवहार पर ध्यान देने से थोड़े समय को ही मदद मिलती है, और इस बात की संभावना बढती है कि बच्चा कोई नया खराब व्यवहार शुरू करे।

 शुरुआत में, आप को हर एक कदम को अलग अलग समझना पड़ेगा और अभ्यास करना पड़ेगा; कुछ समय बाद यह आपका बच्चे के साथ रहने और रोज़मर्रा के काम करने का साधारण तरीका बन जायेगा। इस से आप की सुविधा बढ़ेगी और बच्चे का व्यवहार ठीक रहेगा। 

 

व्यवहार मैं ख़राबी पैदा करने वाली स्थितियों को कम करना

  1. क्या बच्चा अपनी ज़रूरत या इच्छा बता सकता है? यह बच्चे के लिए परेशानी का सबसे बड़ा कारण हो सकता है। किसी भी संचार बढ़ाने के उपयुक्त तरीके का इस्तेमाल करें जिससे बच्चा अपनी ज़रूरी बात या इच्छा बता सके, जैसे बच्चे को चित्र या चिन्ह या अन्य तरीके का प्रयोग करना सिखायें।
  2. क्या बच्चा आपकी बात समझता है? अपनी भाषा को बहुत सादा रखें, किसी बात या अनुदेश को छोटे-छोटे हिस्सों में कहें, हावभाव का प्रयोग करें और बच्चे की समझ बढ़ाने के लिए चिन्ह/चित्र का प्रयोग करें।
  3. क्या वह समझता है कि उसे किस समय क्या करना है? क्या वह नया काम शुरू करने से घबराता है? बच्चे को यह समझाने के लिए कि किस समय, किस जगह और क्या काम करना है, चित्रों से बनी समय-सारिणी (विज़ुअल टाईमटेबल) का  प्रयोग करें – रोज़मर्रा के कामों का एक नियमित कार्यक्रम बनाएं और चित्रों की समय-सारिणी बनाकर बच्चों के लिए इसे जानना आसान करें। काम बदलने के लिए बच्चे को समय दें  (इस के लिए गिनती, घड़ी, ताली बजाने या गाने का प्रयोग करें); इस से बच्चे को काम बदलने और नया काम शुरू करने में आसानी होगी, उस की चिंता कम होगी और वह शांत होगा।
  4. क्या बच्चे को अपना काम करने में मदद मांगना आता है? बच्चे अक्सर किसी काम को ना कर पाने से परेशान हो जाते हैं, उन्हें मदद मदद मांगने का कोई तरीका आना चाहिये – बोल कर, हाव-भाव से दर्शा कर या चित्र/चिन्ह का प्रयोग कर – और मदद आसानी से मिलनी चाहिये।
  5. क्या बच्चे को शोर या आवाज़ों से परेशानी होती है? चारों ओर होने वाले शोर को कम करने की कोशिश करें या हेडफ़ोन का इस्तेमाल कर के देखें। देखें: सवेदनशील बच्चों की मदद करना
  6. अगर बच्चा वातावरण में होने वाली किसी और बात से परेशान हो तो उसे कम करें, जैसे बच्चा इस बात से परेशान हो सकता है कि जब आप बच्चे के साथ हों तो और लोग उसे तमाशे की तरह देखें – जगह और वातावरण थोड़ा शांत बनाएँ। बच्चे को शांत होने के लिए जगह और समय दें। बच्चे को विश्राम करने और शांत होने का तरीका सिखाएं और उस का अभ्यास करें।
  7. अगर बच्चा थका या परेशान हो तो पहले उसे आराम करने दें।

यह सब बातें, जो भी बच्चे के साथ काम करते हैं, उन सभी को समझानी चाहियें जिससे बच्चे की परेशानियां कम की जा सकें।

बच्चे से पारस्परिक संबंध मज़बूत करना

सभी बच्चे और माता-पिता एक दूसरे को प्यार करते हैं। लेकिन बच्चे के काम में और उस की रुचि में रुचि दिखा कर पारस्परिक संबंधों को अच्छा करने के लिए प्रयत्न करता पड़ता है। माता-पिता के ऐसा प्रयत्न करने से बच्चे भी ऐसा व्यवहार करते हैं। माता-पिता का व्यवहार बच्चों के सीखने का आधार होता है। अच्छी पारस्परिकता बनाने से बच्चों को आदर्श व्यवहार करने और सीखने में मदद मिलती है।

पारस्परिक संबंध अच्छे कैसे करें?

इसका मुख्य तरीका है रोज़ होने वाली गतिविधियों में बच्चे के साथ शामिल होना। इस तरह से शामिल होने के लिए आपको और कामों से ध्यान हटाना होगा और बच्चे के साथ उस की रूचि के काम करने में लगना होगा। इस समय जो बच्चा चाहता है वही आप करें और उसे सिखाने पढ़ने की कोशिश ना करें; अभ्यास के साथ यह तरीका भी आसान हो जाएगा।

बच्चे दिन में अक्सर माता-पिता के आस पास ही होते हैं, लेकिन उन पर ध्यान देते हुए उन के साथ शामिल होने के लिए कोशिश करनी पड़ती है। ऐसा दिन में हर समय नहीं किया जा सकता, ना ही उस की ज़रूरत है, माता-पिता को और बहुत से काम होते है और बच्चे को भी अपना समय चाहिये। शुरू में, दिन में करीब तीन या चार बार बच्चे के साथ इस तरह से शामिल होने की कोशिश करनी चाहिये। एक बार इस की आदत होने के बात आप ऐसा और समय भी आसानी से कर पायेंगे।

बच्चे के काम/गतिविधि में शामिल होने का तरीका:

  • काम या गतिविधि को चुनने में बच्चे को पहल करने दें, उसे आदेश ना दें, अपनी इच्छा उस पर ना लागू करें और ज्यादा सवाल ना पूछें। अक्सर बच्चे एक ही तरह के काम या खेल को बार बार दोहराते हैं क्योंकि उन्हें मजा आता है और वह दोहराने से सीखते हैं – आप भी, धेर्य के साथ, इस तरह के काम में शामिल हों और उन्हें हर समय कुछ और करने को ना कहें।
  • बच्चे के पास बैठें, उसे अपना पूरा ध्यान से दें, उसकी बातों को सुनें और उसके काम की नक़ल करें।
  • आसान शब्दों में, बच्चे के काम का वर्णन करें, जैसे “यह मीनार बना दी”, “गुड़िया को खाना अच्छा लगा” ।
  • अगर बच्चे से कोई गलती हो जाये तो उसे सांत्वना दें “कोई बात नहीं, ऐसा हो जाता है, चलो फिर से करें”
  • कोई कमी ना निकालें – सिर्फ प्रशंसा करें “राजू, यह तुमने बहुत अच्छा बनाया है”, “तुम सब से अच्छे बच्चे हो”, “यह तो बहत अच्छा आइडिया है” “तुम यह काम बहुत अच्छा करते हो”। अपनी आवाज़ और हाव भाव में उत्साह दिखाएँ।
  • बच्चे के किये हुए काम, जैसे किसी बनाए हुए चित्र या खेल की, बच्चे के सामने, औरों से प्रशंसा करें।
  • कम से कम शुरुआत में, शामिल होने के लिए ऐसे मौके चुने जब आपके पास अच्छा समय हो (जल्दबाजी ना करें) व आपका ध्यान और कामों में ना बँटे; शामिल होने का अच्छा अभ्यास होने के बाद आप दिन में और मौकों पर और रोजमर्रा के कामों में भी बच्चे के साथ शामिल हो सकते हैं।

इस तरह से बच्चे के साथ शामिल होने से उन का आत्मविश्वास बढ़ता है, वह आप की बातों पर ज्यादा ध्यान देते हैं, उनकी भाषा और सामाजिक समझ बढती है और वह औरों में ज़्यादा रूचि लेते हैं।

बच्चे अच्छा व्यवहार कैसे सीखते हैं?

  1. बच्चे उस व्यवहार को सीखते हैं जिस को करने से उन को कोई फायदा हो या कोई इनाम मिले। यहाँ इनाम का अर्थ उस इनाम से नहीं जो कुछ जीतने पर मिलता है बल्कि ऐसे अनुभव से है जो बच्चे को अच्छा लगे, जैसे प्रशंसा मिलना – सराहना/प्रशंसा/प्यार बच्चों के लिए बहुत बड़ा इनाम है। अपनी पसंद की चीज़ मिलने या अपनी पसंद के काम में शामिल होने से भी बच्चे अपेक्षित व्यवहार को करने के लिए प्रेरित होते हैं। अगर बच्चों को किसी व्यवहार से, चाहे वह अच्छा हो या खराब, कोई फायदा या अच्छा अनुभव ना हो तो वह व्यवहार धीमे धीमे कम होता है।
  2. सीखने की शुरुआत में, यह ईनाम, अपेक्षित व्यवहार होने पर, तुरंत और हर बार मिलना चाहिये जिस से बच्चा इनाम और व्यवहार का सम्बन्ध समझे। एक बार अपेक्षित व्यवहार सीख जाने पर, इनाम कभी-कभी दिये जाने पर भी व्यवहार बना रहता है।
  3. अगर कोई नया व्यवहार बच्चों को सिखाना हो तो उसे करने का तरीका उनकी समझ में आना चाहिये।
  4. जब नया व्यवहार किसी अक्सर होने वाली गतिविधि का हिस्सा हो, तो पूरी गतिविधि सीखने में आसानी होती है, जैसे खिलोनों को संगवा कर रखना बच्चों के खेलने की गतिविधि का एक हिस्सा है।
  5. जब बच्चे को नए व्यवहार को अभ्यास करने के अच्छे मौके मिलें। बच्चे अभ्यास तब करते हैं जब वह परेशान ना हों। बार-बार अभ्यास करना ही सीखने का तरीका है।
  6. बच्चे नए व्यवहार औरों को देख कर भी सीखते हैं। माता-पिता और परिवार का व्यवहार बच्चों के लिए एक सीखने का एक आदर्श होता है।

 

सही व्यवहार को बढ़ाना:

हर बच्चा, चाहे उसका व्यवहार कितना भी खराब हो, कुछ अच्छे काम करता है जो अकसर अनदेखे हो जाते हैं। इन अच्छे व्यवहारों की तरफ ध्यान दे कर इन्हें बढ़ाया जा सकता है। इन को सही तरीके से बढ़ावा देना बच्चे के व्यवहार को सुधारने का एक कारगर तरीका है। सही बर्ताव को बढ़ाने का असर लम्बे समय तक रहता है। अगर आप सही बर्ताव को बढ़ाने के तरीकों को समझ लें, और उसे बच्चे के साथ रहने और काम करने का अपना तरीका बना लें, तो इसका प्रयोग आप बच्चे के साथ हर रोज़, हर गतिविधि में आसानी से कर सकते हैं।

सही बर्ताव के बढ़ने से बच्चे की सामाजिक मिलनसारिता बढती है, पढ़ने और सीखने के परिणाम सुधरते है और परिवार में सामंजस्य बढ़ता है।

तैयारी करें:

अपने बच्चे को ध्यान से देख कर और उसके बारे में सोच कर दो सूची बनायें:

सूची 1: आपका बच्चा क्या अच्छे काम करता है और क्या अच्छे बर्ताव दिखाता है:

यह बर्ताव अक्सर अनदेखे हो जाते हैं – कुछ निम्नलिखित छोटे बर्तावों पर ध्यान दे कर सोचें की क्या आपका बच्चा भी कभी ऐसे अच्छे बर्ताव करता है?

  • अपने आप कोई काम करना या खेलना
  • आपके साथ बैठना
  • औरों के साथ खेलना
  • किताब में तस्वीर देखना
  • कहानी सुनना
  • इशारे से या बोल कर किसी चीज़ को मांगना
  • अपने आप या मांगने पर, किसी चीज़ को औरों को देना
  • नमस्ते करना
  • औरों की तरफ प्यार जताना
  • खाना ठीक से खाना
  • कहना मानना

सूची 2: आपका बच्चा किन चीज़ों में रूचि लेता है, खुश होता है या उन्हें ज्यादा चाहता है? बच्चों की पसंद को मां-बाप अच्छी तरह जानते हैं। इस सूची को बनाने से आप, और बच्चे के साथ काम करने वाले अन्य लोग बच्चे का उत्साह बढ़ाने और उसे ईनाम देने के लिए प्रयोग कर सकते हैं। निम्नलिखित उदाहरणों को देख कर आप को यह सूची बनाने में मदद मिलेगी:

  • सबसे महत्वपूर्ण बात ना भूलें: बच्चों को अपनी ओर ध्यान मिलना, अपनी प्रशंसा सुनना, औरों से प्यार पाना ही सबसे अच्छा लगता है। इस बारे में सोचें कि आप बच्चे की प्रशंसा करने और उसे प्यार करने को बच्चे को किस तरह से दिखाते हैं। आप की आवाज़, हाव-भाव और व्यवहार से बच्चे को यह ज़ाहिर होना चाहिये कि आप उसे प्यार दिखा रहे हैं।
  • कोई स्टिकर या चित्र, जैसे रंगीन स्टार (तारा) का प्रयोग करना: ऐसे इनाम बच्चे को अच्छे लगते हैं और आसानी से बनाए और दिए जा सकते हैं। इनको, जिस दिन भी बच्चे का व्यवहार अच्छा हो, एक कलेंडर पर भी बनाया या चिपकाया जा सकता है – इससे यह बच्चे की सारे परिवार द्वारा प्रशंसा करने का साधन बनेगा – जो भी उस कलेंडर को देखेगा कहेगा “वाह, आज तुमने बहुत अच्छा काम किया”। यह बच्चे का प्रोत्साहन बढ़ाने का भी तरीका बन सकता है: “अगर तुम सात ऐसे स्टिकर जीत लो तो तुम्हें —– इनाम में मिलेगा”
  • कोई खेल खेलना या कोई खिलौना या कोई चीज़ जो बच्चे को बहुत पसंद हो; जब भी बच्चा अच्छा काम या व्यवहार करे उसे कह कर प्रशंसा करें “आज इतना अच्छा —— किया है इस लिए अब —— से खेल सकते हो”
  • कोई किताब, जो बच्चे को अच्छी लगती हो, या कोई कहानी पढ़ कर सुनाना
  • कोई खाना, जो बच्चे को अच्छा लगती हो, उसे देना
  • किसी तरह के संगीत को सुनना जो बच्चे को अच्छा लगता हो
  • कोई और गतिविधि जो बच्चे को अच्छी लगती हो, जैसे घर में या बाहर कुछ खेल खेलना

गतिविधि: सही व्यवहार को बढ़ाना:

निम्नलिखित क्रम का प्रयोग करें:

सूची 1 में एकत्रित व्यवहारों पर अपना और परिवार का ध्यान दिलायें;

बच्चे के छोटे छोटे अच्छे व्यवहार पर भी अपनी निगाह रखें

+

जब भी बच्चा कोई अच्छा व्यवहार करे तो उस पर ध्यान दें

बच्चे की तुरंत प्रशंसा करें और उसे प्यार दें

इस से बच्चे का आत्म विश्वास और सामाजिक रूचि भी बढ़ेगी

ऐसा करते समय निम्नलिखित पर ध्यान दें:

  • प्रशंसा बच्चे का नाम ले कर उस के काम करने की करें “राजू, अच्छी तरह बैठे हो”, “राजू, अच्छा खेल रहे (मांग रहे /दे रहे/खाना खा रहे —-) हो”;
  • बच्चे को बताएं कि उस का यह काम आप को बहुत अच्छा लगता है
  • प्रशंसा करते समय बच्चे के सामने रहें और उस पर पूरा ध्यान दें और उस की तरफ मुस्कुरायें
  • प्रशंसा करते समय बच्चे के काम में कोई कमी ना निकालें
  • औरों के सामने भी बच्चे के उस काम करने की प्रशंसा करें

सारे परिवार को जानकारी दे कर इस योजना में शामिल करें जिस से अच्छे व्यवहार को बार बार बढ़ाया जा सके

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कुछ व्यवहारों को बढ़ाने में, सूचि 2 में से किसी इनाम की भी मदद ली जा सकती है

बच्चों को इनाम देने का तरीका

बच्चे को इनाम दो तरह से दिए जा सकते हैं:

  1. ऊपर लिखे तरीके के अनुसार, किसी अच्छा काम करने के तुरंत बाद इनाम देना
  2. थोड़ा बड़ी उम्र के बच्चों को (करीब चार साल की उम्र से), योजनाबद्ध तरीके से इनाम देना, जैसे हर अच्छा काम करने पर एक अंक देना और 10 अंक इकठ्ठा होने पर कोई इनाम देना। इस से बच्चे को इनाम के लिए प्रतीक्षा करने की भी समझ बढ़ती है और उनका उत्साह बढ़ता है। ऐसा करते समय निम्नलिखित पर ध्यान दें:
    1. एक बार मैं सिर्फ एक व्यहार के बारे में योजना बनाएं और इस योजना को बच्चे को समझायें – अगर ज़रूरत हो तो चित्र/चिन्ह या विज़ुअल टाइम टेबल का प्रयोग करें
    2. व्यवहार ऐसा हो जो बच्चा कर सके
    3. इनाम ऐसा हो जो बच्चे को पसंद हो
    4. इनाम सही समय पर दें और साथ में प्रशंसा भी करें
    5. इनाम हमेशा अच्छा व्यवहार होने के बाद ही दें, पहले इनाम दे कर अच्छे व्यवहार के होने की अपेक्षा ना करें


 

नया सही व्यवहार सिखाना:

सही तरीके से व्यवहार सिखाने से बच्चा वैसा व्यवहार करना सीखता है। सही व्यवहार सीख जाने पर, बच्चा प्रेरणा मिलने पर वह व्यवहार दिखाता है। जब बच्चा सही व्यवहार करता है तो उस को प्रशंसा मिलती है। अपनी प्रशंसा सुन कर बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ता है और उसका नए व्यवहार सीखने का उत्साह बढ़ता है। इस तरह व्यवहार के अच्छे होने का क्रम बनता है। इस का असर लम्बे समय तक रहता है ओर इस से बच्चे और परिवार की ख़ुशी बढती है।

व्यवहार के अच्छे होने का क्रम

1: समय चुनें: नया व्यवहार सिखाने के लिए शुरू में, आपको भी इस का अभ्यास करना पड़ेगा। इस लिए आसानी रहेगी कि आप दिन मैं कुछ (दो या तीन) ऐसे समय चुनें जब आप बच्चे के साथ बिना किसी व्यवधान के करीब 20 मिनट का समय निकाल सकें।

जब आप को इस तरीके का अभ्यास हो जायेगा तब आप यह तरीका दिन में कई बार रोज़मर्रा के कामों के दौरान भी कर सकेंगे।

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2: पहले जितनी भी व्यवहार में परेशानी उत्पन्न होने वाली स्थिति कम  करना हो सके उतनी कम करने की कोशिश करें, इस से बच्चे को अच्छे व्यवहारों को सिखाने में मदद मिलेगी

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3: ऐसा व्यवहार चुनें जो आप बच्चे को सिखाना चाहते हों, जैसे, उदाहरण के लिए, खेलने के बाद खिलौनो को उठा कर ठीक जगह रखना ( पहले बनायी हुई सूची 1 से इसे चुननें में मदद मिल सकती है)।

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4: एक ऐसा काम (या गतिविधि) चुनें जिस का यह अच्छा व्यवहार एक हिस्सा हो, जैसे उदाहरण के लिए, ‘खेलने के बाद खिलौनो को उठा कर ठीक जगह रखना’ बच्चे के खलने की गतिविधि का हिस्सा है। सिर्फ एक हिस्से पर ध्यान देनें से पूरी गतिविधि पर ध्यान देना बेहतर है।

सही व्यवहार सिखाने के लिए एक पूरी गतिविधि सिखाने का क्रम:

‘खिलोनों के साथ खेलना’ गतिविधि का उदाहरण:

1: इसे चार हिस्सों में करने से आसानी होगी:

1) खिलोनों को थेले या डिब्बे से निकालना 2) खिलौने से खेलना, और 3) खिलौनों को उठा कर रखना 4) उस के बाद कोई और काम करना (अगर यह काम भी बच्चे की पसंद का हो तो उस से मदद मिलेगी)

2: चित्रों की सारिणी (विज़ुअल टाइमटेबल) का प्रयोग इस गतिविधि के हिस्सों का क्रम बच्चे को समझायें।

[स्थिति पर अपना नियंत्रण रखें, एक बार में एक ही गतिविधि का सामान सामने रखें, अन्य सामान को थेले या डिब्बे में बच्चे की पहुँच से बाहर रखें।]

3: बच्चे का ध्यान अपनी ओर लेकर उसे भाषा/चिन्ह/चित्र का प्रयोग कर समझायें कि पहले एक काम करेंगे, फिर उसे वापस रखेंगे और फिर दूसरा काम करेंगे।

4: बच्चे के साथ खेल में शामिल हों।

5: खेल का समय पूरा होने पर बच्चे को इशारों/ शब्दों से कहें “खेल ख़त्म” और “संगवाने का समय” – अगर ज़रूरत हो तो चित्रों की सारिणी (विज़ुअल टाइमटेबल) का प्रयोग करें।

5: खुद एक दो खिलोने/चीज़ वापस रख कर बच्चे को करने का नमूना दिखाएँ (उस का ध्यान अपनी ओर ले कर) और उसे प्रेरित करें। 5 सेकंड रुकें, इस दौरान बच्चे की ओर व्यवहार की अपेक्षा से और प्रेरणा से देखें।

6: बच्चे के कुछ ना करने पर फिर से नमूना बच्चे को कर के दिखायें, 5 सेकंड रुक कर बच्चे का हाथ पकड़ कर उसे मदद और और प्रेरणा दें। 5 सेकंड रुकें, इस दौरान बच्चे की ओर व्यवहार की अपेक्षा से और प्रेरणा से देखें।

7: जब बच्चा सही व्यवहार करे तो बच्चे का और काम का नाम ले कर प्रशंसा करें, जैसे “राजू ने अच्छा संगवाया”

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8: समय सारिणी दिखा कर बच्चे की दूसरा काम शुरू करने में मदद करें।

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9: बच्चे की प्रशंसा “राजू ने आज बहुत अच्छा संगवाया” बच्चे के सामने औरों से करें।

10: सारे परिवार को जानकारी दे कर इस योजना में शामिल करें जिस से अच्छे व्यवहार को बार बार दोहराया जा सके।

बच्चे को ख़ुद सही व्यवहार कर के दिखाने का तरीका (मॉडलिंग)

बच्चे आप को व औरों को देख कर व्यवहार सीखते हैं, सही और गलत दोनों।

इस तरह से व्यवहार सिखाने के लिए तीन बाते ज़रूरी हैं, अगर इनमें कोई कमी है तो पहले इन्हें मज़बूत करें:

  1. बच्चा आपकी ओर ध्यान दे,
  2. आपके काम की नकल कर सके, और
  3. बच्चे और आपके बीच अच्छे पारस्परिक सम्बन्ध हों,

बच्चे का ध्यान देने और आपके काम काम की नकल करने की क्षमता बढ़ाने के लिए आप निम्नलिखित करें:

  • बच्चे के खेल में शामिल हों और उस के साथ बारी ले कर खेलें
  • बच्चे का साथ देने के लिए उस के खेल की नकल करें (उस का मज़ाक ना उड़ायें) और उसे आपकी नकल करनें को प्रेरित करें
  • बच्चे को अपने हाव भाव या आवाज़ या किसी क्रिया की नकल करने के लिए प्रेरित करें

बच्चे से अच्छे पारस्परिक सम्बन्ध बनाना पर ध्यान दे कर अपने सम्बन्ध को मज़बूत करें

दिखा कर व्यवहार सिखाने के लिये इस क्रम का प्रयोग करें:

  • ऐसा समय और स्थिति चुनें जब बच्चा शांत हो
  • बच्चे का ध्यान अपनी ओर खींच कर सही व्यवहार दिखाएँ (जैसे, अतिथि को हाथ जोड़ कर नमस्ते करना, ब्रश से दांत साफ़ करना)
  • थोड़ी देर रुक कर फिर से दिखाएँ
  • बच्चे की मदद कर के (जैसे, उस के हाथों को एक साथ ला कर, उस को ब्रश पकड़ा कर)
  • जैसे ही बच्चा सही व्यवहार की कोशिश मात्र करे उस की प्रशंसा करें, उस के काम में कमी ना निकालें
  • इस का अभ्यास करें, हर बार बच्चे को पहले अपने आप करने को प्रेरित करें

बच्चे को क्या सही व्यवहार सिखायें

  • अगर वह कोई काम नहीं करना चाहता तो हाथ हिला कर या चिन्ह दिखाकर या कह कर मना करे
  • अगर उसे मदद चाहिये तो आवाज़ दे कर या चिन्ह दिखाकर मदद मांगे

यह सिखाने के लिए

  • बच्चे को को यह सिखाना होगा कि ऐसा कब करें और कैसे करें, चाहे वह ऐसा चिन्ह या चित्र की मदद से कहे या शब्द बोले
  • जब भी बच्चा मदद मांगे या मना करे तो उस पर ध्यान दें और उसकी मदद करें साथ ही उसके सही कहने की प्रशंसा करें


 

बच्चे को नियमित काम करने में समर्थ कैसे बनाएं?

कई सही काम सिखाने का अच्छा तरीका एक नियमित कार्यक्रम बना कर उस का पूरा क्रम सिखाना होता है। बच्चों को नियमित कार्यक्रम सीखने से काम करने में आसानी होती है। नियमित कार्यक्रम उन कामों के बनाए जा सकते है जो रोज़ या दिन में कई बार होते हों, जैसे खाने की जगह बैठ कर खाना खाना, खेलने के समय खेलना, पढ़ने के समय पढ़ना, रात को सोने के लिये तैयार होना, तैयार हो कर स्कूल जाना। अगर नियमित काम करने का बच्चे को अभ्यास हो जाए तो उस के व्यवहार में कम परेशानी होती हैं।

पहले नियमित कार्यक्रम की गतिविधि को कुछ छोटे हिस्सों में बनाएं, और फिर उसे एक एक कर के सिखाएं, जैसे:

  • सही जगह बैठना + खाना ठीकसे खाना
  • खिलोने का थेला/डिब्बा लाना + खेलना + खिलोनें उठा कर रखना
  • सोने के लिए कपड़े बदलना + दांत साफ़ करना + बिस्तर पर लेट कर किताब देखना/कहानी सुनना
  • दांत साफ़ करने में चार कदम हैं: 1) पहले ब्रश धोना 2) ब्रश पर मंजन लगाना 3) ब्रश को दांतों पर लगाना 4) पानी से मुंह धोना।

कुछ नियम बनाएं (एक या दो), जैसे:

  • चीज़ें फ़ेंकना मना है व औरों को मारना मना है

गतिविधि के हिस्से और नियम एक कागज़ पर लिखें और बच्चे को वह अकसर दिखाएँ;

गतिविधि:

  • चित्रों/चिन्हों की मदद से, नियमित कार्यक्रम के हिस्सों की एक समय-सारिणी (विज़ुअल टाइमटेबल) बनाएं।
  • बच्चे को समय सारिणी (विज़ुअल टाइमटेबल) दिखाकर गतिविधि का एक एक हिस्सा करने में मदद करें।
  • जैसे ही बच्चा कोई हिस्सा सही करे उसे प्रशंसा दें
  • बच्चे को काम के सारे हिस्से आने पर पूरी गतिविधि एक साथ करने को प्रेरित करें और उस की मदद करें
  • गतिविधि करने की कोशिश करने पर बच्चे की प्रशंसा करें/ईनाम दें।

बच्चों को माता-पिता का कहना मानना सिखाना

माता-पिता की कही हर बात कोई बच्चा नहीं मानता – यह सामान्य व्यवहार है।

परिस्थितियों जिनमें बच्चों को माता-पिता की बातें मानने में परेशानी होती है,

इन परिस्थितियों के होने के निम्नलिखित कारणों को, जितना हो सके, कम करने से बच्चे का आपकी बात मानने का व्यवहार बढ़ेगा:

  • बच्चे की समझ में कही हुई बात का ना आना: भाषा को बच्चे की समझ के अनुसार सरल बना कर बोलें।अगर हो सके तो अनुदेश को छोटे हिस्सों में बाँट कर एक छोटा हिस्सा एक बार कहें। अगर ज़रूरत हो तो चिन्ह्/चित्र का प्रयोग करें
  • बच्चे और माता-पिता के बीच अच्छे संबंध ना होना -देखें: बच्चे से पारस्परिक संबंध मज़बूत करना

निम्नलिखित को करने से अनुदेश मानने का व्यवहार बढ़ता है:

  • अनुदेश मानने का अभ्यास कराने के लिए शुरू मैं बच्चे को ऐसा काम करने को कहें जो वह खुद करना चाहता हो या जो वह करने ही वाला हो। इस तरह आसान काम से अभ्यास कराने से बच्चे को अनुदेश मानने की आदत पड़ेगी।
  • अनुदेश मानते ही अपनी ख़ुशी ज़ाहिर करें और बच्चे की प्रशंसा करें
  • बच्चे के अनुदेश मानने के व्यवहार का उससे बाद भी ज़िक्र करें, औरों के सामने इस बात की प्रशंसा करें। किसी अनुदेश को ना मानने का ज़िक्र ना करें।
  • सोच कर (क्या इस अनुदेश की वाकई ज़रूरत है) सिर्फ वही अनुदेश दें जो आप वाकई बच्चे से कराना चाहते हों, ज़्यादा अनुदेश ना दें।
  • अगर आपको ऐसा लग रहा है कि बच्चा जल्दी में है, या किसी और वजह से अनुदेश नहीं मानेगा, तो उसे अनुदेश ना दें
  • बच्चे का ध्यान पहले अपनी ओर लें और फिर साफ़ भाषा में बोलें
  • अपनी आवाज़ में गुस्सा ना दिखाएँ
  • अगर अनुदेश देने की वजह बच्चे को बतानी है तो उसे पहले कहें, फिर अनुदेश दें (हम बाहर जा रहे हैं, इसलिए अब अपने खिलौने उठा कर रख दो)
  • अनुदेश हमेशा नकारात्मक ना बनाएं (“यह मत करो”, “वह मत करो”), उसे सकारत्मक बनाने की कोशिश करें (“अब यह करो”)
  • अनुदेश देते समय बच्चे की प्रशंसा करें (“मुझे मालूम है तुम कितने अच्छे बच्चे हो, अब यह कर दो”)
  • बच्चा जो काम कर रहा हो उसे छोड़ कर दूसरा काम करने के लिए समय दें (“पांच मिनट और —- कर लो फिर —- करना”)
  • बच्चे को आपकी बात समझने के लिए और अनुदेश का पालन करने के लिए समय दें
  • जिस नियम का अनुदेश दें उस पर स्थिर रहें। अपनी सहूलियत की लिए नियम ना बदलें वर्ना बच्चा नियम या अनुदेश का पालन करना नहीं सीखेगा।
  • अगर अनुदेश मानने या बच्चे की प्रेरणा बढ़ाने के लिए आपने बच्चे से किसी अच्छे काम करने या चीज़ मिलने का वादा किया हो तो उसे हमेशा तुरंत पूरा करें

 


 

बच्चे के गलत व्यवहार को कम करना

जब बच्चा ख़राब बर्ताव करे तब क्या करें?

  1. गलत प्रतिक्रिया ना करें

ख़राब बर्ताओं से निपटना सभी के लिए बहुत मुश्किल होता है और अक्सर माता-पिता परेशान हो कर, या आदतन या सही तरीका ना जानने की वजह से कुछ ऐसे काम करते हैं जो नहीं करने चाहियें। यह बात परिवार में सब को समझा कर सही प्रतिक्रिया करने का अभ्यास करना होगा।

गलत प्रतिक्रिया ना करने के इन नियमों का प्रयोग करें:

  • बच्चे पर चिल्लाएं ना और उस पर गुस्सा ना करें, इस से गलत व्यवहार बढ़ेगा
  • बच्चे के गलत व्यवहार पर ना हँसें और उसका मज़ाक ना उड़ायें
  • बच्चे के साथ ज़ोर ज़बरदस्ती ना करें
  • बच्चे से बहस ना करें
  • बच्चे की गलत बात ना माने वरना बच्चा गलत व्यवहार कर के अपनी इच्छा पूरी कराना सीख जाएगा
  • ऐसा ना करें कि कभी बच्चे के गलत व्यवहार दिखने पर उस की बात मान लें और कभी ना मानें
  • बच्चे को कोई और इनाम दे कर खुश करने की कोशिश ना करें
  • इस समय, बच्चे को अच्छा व्यवहार सिखाने की कोशिश ना करें
  • बच्चे के व्यवहार की औरों के सामनें बुराई ना करें

गलत प्रतिक्रिया ना दिखाने से वह व्यवहार कम होता है। कभी सही और कभी प्रतिक्रिया करने से बच्चे का व्यवहार और खराब होता है।

  1. सही प्रतिक्रिया कैसे दिखायें

खराब बर्ताव होते समय सही काम करने के लिए आप को इस बारे में पहले से थोड़ा सोच कर एक योजना बनानी पड़ेगी और उस पर सारे परिवार को अमल करना पड़ेगा। इस तरीके से व्यवहार पर नियंत्रण पाना आसान होगा और बच्चे का व्यवहार सुधरेगा।

सही प्रतिक्रिया करने का पहला कदम:

इन सावालों का जवाब, अपने बच्चे के बर्ताव के बारे में, ध्यान से सोचें:

  1. बच्चे का खराब बर्ताव क्या है और किस स्थिति में होता है? क्या आपने उन स्थितियों को बच्चे के अनुकूल करने या बच्चे के परेशानी कम करने के बारे कुछ किया है?
  2. अगर बच्चे का बर्ताव खराब ना होता तब वह इस स्थिति में क्या सही व्यवहार करता? जैसे उधारण के लिए, बच्चा बजाय चीखने चिल्लाने के, इशारे या चिह का इस्तेमाल कर के कोई चीज़ मांगता या किसी काम को करने से मना करता; थकने पर या परेशान होने पर आराम करता या अपनी परेशानी बताता।
  3. क्या आपने बच्चे को यह सही व्यवहार को सिखाने का प्रयत्न किया है और उस का अभ्यास किया है, जिस से ज़रूरत होने पर बजाये खराब व्यवहार के बच्चा उस सही व्यवहार को करे?

दूसरा कदम:

  • अगर आप बच्चे के बिगड़ते हुए व्यवहार का पूरा बिगड़ने से पहले ही अंदेशा हो जाए, तो बच्चे का ध्यान बटा कर उस का ध्यान पहले से सीखे हुए सही व्यवहार को करने में लगाएं। इस के लिए आपको, जब बच्चा शांत हो तब नया सही व्यवहार सिखाना मैं बताये तरीके का इस्तेमाल करना होगा, गलत व्यवहार होते समय आप नया व्यवहार नहीं सिखा सकते।
  • अगर खराब व्यवहार शुरू हो जाए, तो उस पर ध्यान ना दें, बच्चे को सही व्यवहार करने के लिए मदद और प्रेरणा दें।
  • अगर बच्चा सही व्यवहार करने की कोशिश भी करे तो उस की प्रशंसा करें और उस का उत्साह बढायें।

तीसरा कदम: जब बच्चा खराब व्यवहार करने से ना रुके

  1. बच्चे के बर्ताव पर, बिना गुस्सा हुए अपनी नापसंदगी ज़ाहिर करें
    1. बच्चे का ध्यान अपनी ओर लें
    2. दृढ लेकिन शांत आवाज़ में कहें: “नहीं, ऐसा मत करो” या “रुक जाओ”; आपके चेहरे पर नापसंदगी के भाव हों, गुस्से के नहीं
  2. 10 सेकंड का समय दें, खुद शांत रहें
  3. अगर बच्च खराब व्यवहार ज़ारी रखे तो क्रम 1 को दुहरायें
  4. अगर बच्चा खराब व्यवहार ज़ारी रखे तो अगला कदम लें

चौथा कदम: गलत व्यवहार को अनदेखा करना:

गलत व्यवहार को अनदेखा करना आसान नहीं है। माता-पिता ऐसा करने की कोशिश करते है लेकिन अकसर कर नहीं पाते, बच्चे से प्यार या स्थिति की परेशानियों की वजह से वह बच्चे को गलत ध्यान दे देते हैं या उसकी बात मान लेते हैं। इस तरह कभी अनदेखा करने और कभी ना करना, बच्चे के लिए लॉटरी खेलने की तरह काम करता है और बच्चे के गलत व्यवहार को बढ़ाता है। इस वजह से माता-पिता गलत निष्कर्ष निकालते हैं कि यह तरीका काम नहीं करता।

कुछ व्यवहार औरों ध्यान खींचने या अपनी बात मनवाने के लिए नहीं होते, जैसे अपनी बात ना कह पाने की वजह से बच्चे का परेशान और गुस्सा होना, खाना चुरा कर खाना या गलत चीज़ें खाना, । इस लिए, पहले बच्चे के व्यवहार के बारे में सोच कर और उस के संभावित कारण को सोचें; हो सकता है बच्चे को उसका संचार बढ़ाने में मदद की ज़रूरत हो या आप को उसके संकेत जल्दी समझने की ज़रुरत हो।

गलत व्यवहार को अनदेखा करने के लिए निम्नलिखित को समझ कर योजना बनानी पड़ेगी और परिवार के अन्य लोगों को भी साथ लेना पड़ेगा:

  • किसी एक गलत व्यवहार को इस योजना के लिए चुनें, जैसे बच्चे का उस की इच्छा पूरी ना होने पर चीखना चिल्लाना
  • आपको बच्चे के गलत व्यवहार, उस का रोना चिल्लाना, हाव-भाव सब अनदेखा करना है – इस लिए नहीं कि आप बच्चे को नहीं चाहते – इसलिए कि आप बच्चे के व्यवहार को अच्छा करना चाहते हैं
  • अनदेखा करते समय अपने आप को किसी और काम में व्यस्त करें
  • जैसे ही बच्चा शांत हो जाए या उस का व्यवहार सुधरे, उस को अपना पूरा ध्यान दें – आप गलत व्यवहार को अनदेखा कर रहे हैं बच्चे को नहीं
  • बच्चे से बहस ना करें और उस की बुराई ना करें – आप अपना ध्यान हटा रहे हैं – बच्चे को इस बात का आभास होना चाहिये कि गलत व्यवहार करने उस को ध्यान कम मिलता है
  • बच्चे की, व अन्य लोगों की सुरक्षा का ध्यान रखें, अगर किसी को चोट लगने का कोई खतरा हो तो तुरंत उसे रोकें
  • इस बर्ताव की बाद में बुराई ना करें, बच्चे के हर अच्छे व्यवहार पर ध्यान दें और उस की प्रशंसा करें – सारे परिवार को ऐसा ही करने को कहें।

इन तरीकों का प्रयोग करने पर, बच्चे का व्यवहार सुधरने से पहले कुछ दिन के लिए और खराब हो सकता है, लेकिन फिर ठीक ज़रूर होगा; धेर्य बना कर काम करें व औरों की मदद लें।

पांचवां कदम: व्यवहार के परिणाम देने का प्रयोग करना

बच्चों का व्यवहार किसी वजह से या किसी परिणाम को पाने के लिए होता है। बच्चों के सही बर्ताव करने पर अन्हें अच्छे परिणाम दे कर प्रेरित किया जा सकता है; इसी तरह गलत व्यवहार के ऐसे परिणाम से जो उन्हें अच्छा ना लगे वह उस व्यवहार से हट भी सकते हैं। अभी तक, आपने बच्चे को अच्छे परिणाम, जैसे उसकी  प्रशंसा करना या इनाम देना, दे कर उसके अच्छे व्यवहार बढाने के लिए किया है – यह बच्चों के व्यवहार को सुधारने का सबसे अच्छा तरीका है। आपने बच्चे के गलत व्यवहार करने पर या किसी नियम को ना मानने पर, उस से ध्यान हटा कर, उसे कुछ खोने का परिणाम भी दिया है।

इसी तरह का एक परिणाम बच्चे को समय-बाहर (Timeout) देना है – इसमें बच्चे को थोड़े समय (ज्यादातर 3 मिनट) के लिए अपनी पसंद की जगह या अपनी पसंद का काम छोड़ कर, औरों से अलग हो कर दूसरी जगह (जैसे, कमरे के कोने में एक कुर्सी या दरी) पर बैठने को कहा जाता है। इस तरीके का प्रयोग 5 साल से बड़े बच्चे के इस तरह के व्यवहार को सुधारने के लिए जाता है जिन से बच्चा हट ना पा रहा हो और बार-बार करता हो – लेकिन यह बात और यह तरीका आटिस्म के दोहराने वाले (repetitive) व्यवहारों पर लागू नहीं होती।

समय-बाहर (Timeout) को प्रयोग करने का तरीका

  1. बच्चे का व्यवहार चुनें: जैसे
    1. बच्चे को किसी अनुदेश को मानने से मना करना
    2. घर/स्कूल के नियम ना मानना

एक बार में एक ही व्यवहार पर इस तरीके का प्रयोग करें।

  1. इस तरीके का प्रयोग करते समय (वैसे तो, हमेशा ही ऐसा करें) बच्चे के हर ठीक व्यवहार की खूब प्रशंसा करें
  2. बच्चे को समय-बाहर (Timeout) का नियम, जब बच्चा शांत हो, समझायें (क्या गलत व्यवहार करने पर किस जगह बच्चे को बेठना है और कितनी देर के लिए, इस जगह का एक नाम रखें, जैसे “सोचने की जगह”)
  3. जब भी बच्चा उस गलत व्यवहार को करे उस को 3 मिनट के लिए समय-बाहर (Timeout) के लिए ‘सोचने की जगह’ भेजें
  4. बच्चे से बहस ना करें, कोई और बात ना करें, खुद शांत रहें
  5. जब भी बच्चे को समय-बाहर (Timeout) करना पड़े उस के बाद उस को सही काम करने को कहें
  6. जैसे ही बचा सही व्यवहार करे उस की प्रशंसा करें
  7. बच्चे का मज़ाक ना बनाएं और उस की बुराई ना करें

याद रखें, बच्चा आप की प्रतिक्रिया, आप के भाव, ध्यान या प्रेरणा से व्यवहार ज़्यादा सीखता है आप के शब्दों से कम!

 

समय-बाहर (Timeout) का मतलब बच्चे को उस की पसंद के काम से अलग कर के उसे उसके व्यवहार का ऐसा परिणाम दिखाना है जो उसे अच्छा ना लगे। इस दोरान बच्चे से औरों के ध्यान को हटाना है। इस तरीके का प्रयोग के लिए बच्चे में इस बात की समझ होनी चाहिये के क्या हो रहा है और क्यों हो रहा है। अगर बच्चे में इस तरह की समझ नहीं है या बच्चा छोटा है तो इस तरीके का प्रयोग ना करें।

 

बहुत से माता-पिता बच्चों के व्यवहार सुधारने के लिए परिणामों का प्रयोग करते है जैसे बच्चे से उसकी पसंद की चीज़ ले लेना या समय-बाहर (Timeout) का प्रयोग करना; कुछ माता-पिता बच्चों को दंड भी देते हैं, लेकिन बच्चों के व्यवहार सुधारने के लिए सब से कारगर तरीके बच्चों से सम्बन्ध अच्छे बनाना, उन्हें अच्छे व्यवहार सिखाना और उनकी परेशानी कम करना हैं। दंड देने से बच्चों का आत्मविश्वास घटता है और उनके व्यवहार में नयी खराबियां आती हैं।

 

अगर बच्चा बहुत परेशान हो जाए तब क्या करें

  1. बच्चे की परेशानी को स्वीकारें, शांत आवाज़ में कहें “मुझे मालूम है आप बहत परेशान हो, अब शांत हो जाओ”
  2. ऐसा कहते समय बच्चे को कोई प्रेरणा या ज्यादा ध्यान ना दें,
  3. अपने चेहरे पर ज्यादा भाव ना दिखाएँ
  4. बच्चे की गलत बात को ना मानें, उसके साथ इस समय कोई समझोता ना करें
  5. बच्चे की सुरक्षा का ध्यान रखें, अगर कोई खतरा लगे तो तुरंत उसे हटायें

जब बच्चा शान्त हो जाए तब उसको अपना पूरा ध्यान दें उसको यह बात कहें या ज़ाहिर करें कि आपको उसका शांत व्यवहार बहुत अच्छा लगता है। उसकी ज़रूरत को पूरा करें और उस की बुराई ना करें।

ख़ुद को मारने/काठने के व्यवहार को कम करना

ऐसा व्यवहार से बच्चे की देखभाल में परेशानी पैदा करता है। अकसर माता-पिता व शिक्षक ऐसे व्यवहार पर गलत प्रतिक्रिया दिखाते हैं जिस से बच्चे के खराब व्यवहार बढ़ते हैं।

हर व्यवहार किसी वजह से होता है, बच्चे पर ध्यान दे कर उस के व्यवहार की वजह समझने की कोशिश करें।

  1. बच्चे ऐसा व्यवहार परेशान होने पर ज्यादा करते हैं। इस लिए, पहला कदम इसे कम करने के लिए व्यवहार मैं ख़राबी पैदा करने वाली स्थितियों को कम करना में बताये गए तरीके का इस्तेमाल करना है।
  2. इस बर्ताव की दूसरी बड़ी वजह बच्चों की समझ और संचार में कमी है। बच्चों के संचार बढ़ाने के तरीके का इस्तेमाल करें
  3. अकसर बच्चे ऐसा बर्ताव कुछ परिणाम पाने के लिए करते हैं, जैसे कोई चीज़ या काम चाहना, अपनी ऊब कम करना या किसी काम को करने से बचना। बच्चे को नये सही बर्ताव सिखाना मैं दिए तरीकों का इस्तेमाल करें और नए सही व्यवहार का अभ्यास कराएं। जब भी बच्चा अपने को मारे या काठे तो उसे सही व्यवहार करने को प्रेरित करें।
  4. बच्चे का सही बर्ताव करने के समय को बढायें (सही व्यवहार को बढ़ाना), इस से खराब बर्ताव कम होंगे।
  5. कई बच्चे अपने को मारने/काठने के व्यवहार नयी संवेदनाएं पाने के लिए करते हैं। बच्चे को नयी संवेदनाएं पाने के साधन, जैसे संगीत वाले खिलोने, चबाने की सुरक्षित चीज़ें, छूने/दबाने से संवेदना देने वाले खिलौने दे कर उनसे खेलने का अभ्यास कराएं। ऐसी चीज़ें बच्चे के साथ रखें जिस से वह ज़रूरत होने पर उनको प्रयोग कर सके।
  6. अगर बच्चा एस बर्ताव औरों का ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए करता हो तो इस बर्ताव पर ध्यान कम दें और नए सिखाये हुए बर्ताव पर ध्यान और प्रशंसा ज़्यादा दें।