सामाजिक विकास का दिमाग

हमारी ज्यादातर सामाजिक समझ और हमारा व्यवहार सामाजिक स्थितियों में औरों के व्यवहार से  सीखा हुआ होता है| बदलती हुए परिस्थितियों में हम बिना परेशानी के अपना व्यवहार बदलते रहते हैं| औरों के व्यवहार को समझने और अपने व्यवहार को बदलने के लिए हम अपनी सोच, समझ और अहसासों का सहारा लेते हैं| यह सोच, समझ और अहसास हमारे मस्तिष्क की रचना और क्रिया पर निर्भर करता है| इसका एक आसन सा नक्शा कुछ ऐसा बनाया जा सकता है:

सामाजिक सोच समझ और व्यवहार हमारे दिमाग के किसी एक हिस्से से ही नहीं बनती है, इसमें दिमाग के हिस्से मिलकर एक नेटवर्क की तरह काम करते हैं| इस नेटवर्क में शामिल दिमाग के मुख्य हिस्से हैं:  cortical areas such as orbitofrontal cortex, superior temporal sulcus, temporoparietal junction, fusiform face are and subcortical structures, such as amygdala[i].

सामाजिक सोच समझ की प्रक्रिया और उसमें शामिल हमारे दिमाग के हिस्से[ii]

सामाजिक सोच समझ की प्रक्रिया उसमें शामिल हमारे दिमाग के हिस्से
संवेदनाओं को समझने की प्रक्रिया Superior colliculus

Fusiform gyrus

 

औरों के व्यवहार को समझना Mirror neurons

Premotor cortex

प्रेरित होना Anterior cingulate cortex
औरों की सोच को समझना Temporoparietal junction

Medial frontal cortex

Posterior cingulate

सहानबूती और नैतिकता के एहसास Insula

Ventromedial prefrontal cortex

सामाजिक विवेक Prefrontal cortex
सामाजिक नियमों का पालन Prefrontal cortex

Anterior cingulate cortex

अपने व्यवहार के नतीजों को समझना Amygdala (also discriminating signal from noise, threat from reward, or friend from foe and thereby guiding adaptive interpersonal behaviour)

Orbitofrontal cortex

Ventral striatum

दिमाग के हिस्सों के बीच बने समबद्धों के ख़राब होने से भी विकास में आटिज्म जैसा विकार हो सकता है – 30%  बच्चों को जिनका corpus collosum ठीक से विकसित नहीं होता आटिज्म जैसी परेशानी होती है| [iii]

 

इस चित्र में “सामाजिक दिमाग” के  हिस्सों को दिखाया गया है:

और इस चित्र में दिखाया गया है कि सामाजिक के हिस्से आपस में नेटवर्क की तरह कैसे संगठन करते हैं:

“सामाजिक” दिमाग और समझ में सम्बन्ध एक ही दिशा में नहीं है

समाज में सफलता से रहने में एक लम्बे समय तक बदलती हुई स्थितियों में औरों के साथ मिल-जुल कर रहना पड़ता है| हालाँकि ऐसा लगता है जैसे यह सारी बात दिमाग के विकास और संगठन पर ही निर्भित है, लेकिन हमारी सामाजिक रह्पाने की सफलता से हमारे दिमाग के विकास और संगठन और हमारी सोच समझ में भी मदद मिलती है[iii] |

[i] Mayada Elsabbagh and Mark H. Johnson. Autism and the Social Brain: The First-Year Puzzle. Volume 80, Issue 2, 15 July 2016, Pages 94–99. http://dx.doi.org/10.1016/j.biopsych.2016.02.019

[ii] Adolphs R. The social brain: neural basis of social knowledge. Annu Rev Psychol. 2009;60:693-716. doi: 10.1146/annurev.psych.60.110707.163514.

[iii] Eisenberger NI, Cole SW. Social neuroscience and health: neurophysiological mechanisms linking social ties with physical health. Nat Neurosci. 2012;15:669–674

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