बच्चों के व्यवहार की चार मुश्किल स्थितियां

ऑटिज़्म होने वाले बच्चों के व्यवहार की चार मुश्किल स्थितियां:

1. टेंटृम

बच्चे ऐसा तब करते हैं जब उनकी कोई माँग पूरी न हो; ऐसा साधारण विकास के बच्चे भी करते हैं, लेकिन ऑटिज़्म होने वाले बच्चों में यह ज़्यादा लम्बे समय तक हो सकता है। ऐसा करते समय बच्चे औरों का ध्यान अपनी ओर लेने की पूरी कोशिश करते हैं और

ऐसी स्थिति में बच्चे की मांग मान लेने से बच्चे ऐसे व्यवहार करना सीख जाते है और फ़िर इसे अकसर करते हैं। कभी कभी बच्चे अपने पर काबू खो देते हैं और शांत नहीं हो पाते।

 

टेंटृम का समाधान: अगर बच्चा बहुत ज़्यादा गुस्सा हो और परेशान हो जाए तब क्या करें?

ऐसा अक्सर तब होता है जब बच्चे को यह नहीं सिखाया गया होता कि उसे शांत कैसे होना है और सही व्यवहार क्या है।

  • शांत रहें। आपकी घबराहट केवल स्थिति को बदतर बना देगी। रोना या चिल्लाना न करें और अपनी आवाज़ को स्थिर बना कर रखें; बच्चों को दृढ़ता से आश्वस्त किया जाता है।
  • टेंटृम के शुरू होने के संकेतों को समझ कर, जैसे ही आपको लगे कि यह शुरू होने वाला है, बच्चे की रुचिके हिसाब से उस का ध्यान बटायें और बच्चे को शांत करें।
  • अगर टेंटृम शुरू हो जाए, बच्चे से, बिना ज़्यादा भाव दिखाए, कहें कि आप जानते है कि वह बहुत परेशान है
  • अपने चेहरे और आवाज़ के भाव को कम दिखायें
  • इस अवस्था में बच्चे से कोई समझौता करने कि कोशिश न करें, न हीं उसे शांत होने के लिए रिश्वत दें
  • बच्चे की बुराई न करें न ही इस समय उसे कुछ सिखाने की कोशिश करें
  • बच्चे की सुरक्षा का ध्यान रखें
  • शांत होने पर बच्चे की प्रशंसा करें और उसे सही व्यवहार सिखायें

2. मेल्टडाउन

मेल्टडाउन में, किसी तनाव पूर्ण स्थिति के बाद बच्चा, बिना दूसरों की कोई परवाह किये,  बहुत ज़ोर से या लम्बे समय के लिए गुस्सा होता है या रोता है। इस में और टेंटृम में मुख्य फर्क यह है कि टेंटृम बच्चे की बात न माने जाने पर शुरू होता है और बच्चा दूसरों की प्रतिक्रिया को भांपता रहता है, जब की मेल्टडाउन में बच्चा दूसरे की प्रतिक्रिया पर ध्यान नहीं देता।

 

मेल्टडाउन के समय बच्चे की मदद करना 

शांत रहें। आपकी घबराहट केवल स्थिति को बदतर बना देगी। रोना या चिल्लाना न करें और अपनी आवाज़ को स्थिर बना कर रखें; बच्चों को दृढ़ता से ही आश्वस्त किया जाता है।

  • मेल्टडाउन के शुरू होने के संकेतों को समझ कर, जैसे ही आपको लगे कि यह शुरू होने वाला है, बच्चे की रुचि के हिसाब से उस का ध्यान बटायें और बच्चे को शांत करें।
  • अगर मेल्टडाउन शुरू हो जाए, बच्चे से, उसे भरोसा देते हुए, कहें कि आप जानते है कि वह बहुत परेशान है
  • बच्चे से कोई मांग न करें और वातावरण को शांत करें – शोर और रौशनी कम करें
  • बच्चे को शांत करने के लिये उसे सहारें, गले लगाएँ या उसकी पसंद का संगीत सुनायें,
  • अगर बच्चा अकेला रहना पसंद करे तो उसे शांत वातावरण में अकेला छोडें
  • ऐसा न करें:
    • बच्चे की बुराई न करें
    • बच्चे से बहस न करें
    • इस समय उस को सही व्यवहार सिखाने की कोशिश न करें
  • बच्चे की सुरक्षा के प्रति जागरूक रहें
  • बच्चे के शांत हो जाने के बाद उस से सही व्यवहार के बारे में बात करें
  • बच्चे के मानसिक तनाव को कम करने की योजना बना कर उस पर अमल करें

 

जब बच्चे को टेंटृम या मेल्टडाउन  हो तो क्या उसे अस्पताल ले जान चाहिये?

ऐसी स्थिति में ऑटिज़्म होने वाले बच्चे अस्पताल के वातावरण में अच्छी प्रतिक्रिया नहीं दिखाते। अस्पताल के वातावरण में उनका व्यवहार अक्सर चिड़चिड़ा और आक्रामक हो जाता है। टेंटृम या मेल्टडाउन के समाधान में दवाओं की लगभग कोई भूमिका नहीं है। अगर आपने उपर लिखे तरीके पर काम किया है, और अभी भी आपके बच्चे के व्यवहार के साथ गंभीर मुद्दे हैं तो एक बाल मनोचिकित्सक से सलाह लें।

 

याद रखें, इस तरह के व्यवहार की परेशानियों को होने से पहले रोकना ही सबसे अच्छा तरीका है:

p  बच्चे के साथ संवाद या बात-चीत के तरीके को सुधारना, चाहे तो चिन्हों या इशारों का इस्तेमाल कर के

p  बच्चे को कुछ ऐसे काम करना सिखाना जिन में उस की रुचि हो और जिन को करने में उसे मज़ा आता हो, इन का इस्तेमाल कर के आप परेशान बच्चे का ध्यान बटा सकते हैं

p  बच्चे को अच्छे व्यवहार सिखाना, जैसे माँगना, देना दिखाना और बांटना

p  बच्चे के आस पास के माहौल में से शोर या और किसी परेशान करने वाली संवेदना को कम करना, और बच्चे को शांत होना और आराम करना सिखाना

 

3. शटडाउन (मानसिक और शारीरिक निष्क्रियता)

कुछ बच्चे धीमे धीमे औरों से बातचीत करना, बोलना, रोज़मर्रा के काम करना, और यहाँ तक कि खाना खाना भी कम कर देते हैं। इनके शरीर की चलन भी कम हो जाती है और यह अक्सर शिथिल दिखाई देते हैं। यह भी हो सकता है कि  बच्चा किसी एक समय ऐसा लगे जैसे उसे शटडाउन है और दूसरे समय ठीक लगे। सही मदद न मिलने पर यह स्थिति और खराब हो सकती है।

 

शटडाउन अवस्था के समय बच्चे की मदद करना 

  • क्या वातावरण में ऐसा कारण है जो बच्चे को मानसिक तनाव पैदा कर रहा हो?
    • पहले उस को कम करें
      तनाव कम करने की योजना
      संवाद में कमी: औरों से अपनी बात न कह पाने या औरों की बात न समझ पाने की वजह से होने वाले तनाव (अपनी ज़रूरत को न बता पाना बच्चे में निराशा और तनाव पैदा करता है और उसका व्यवहार खराब करता है):
      1. क्या बच्चा अपनी ज़रूरतों और परेशानी के बारे में बता सकता है? अगर नहीं, तो:

      • बच्चे को दूसरों से संवाद करने के तरीके जुटायें, जैसे इशारे का इस्तेमाल करना, चित्र का इस्तेमाल करना
      • बच्चे को इनका इस्तेमाल कर के अपनी ज़रूरत और भावनाओं को ज़ाहिर करना सिखायें
      • बच्चे को मदद मांगने का ऐसा तरीका सिखायें जिसे सभी समझते हों, जैसे हाथ उठाना, और इस का अभ्यास करें
      2. क्या बच्चा दूसरों की बात समझ पाता है? अगर नहीं, तो:

      • इशारों और चेहरे के  भावों का इस्तेमाल करें
      • अपनी भाषा को बहुत सरल रखें,
      • अपनी बात को छोटे हिस्सों में बाटें
      • इशारों, तस्वीरों या चिन्हों का इस्तेमाल करें
      संवेदनशीलता की वजह से होने वाले तनाव 
      क्या बच्चा शोर, रौशनी, भीड़ से परेशान हो जाता है? अगर हाँ, तो:

      • तेज़ रोशनी को कम करें
      • शोर कम करें
      • ज़ोर से न बोलें
      • अगर आप शोर कम नहीं कर सकते तो बच्चे के कानों को ढकें (हेडफोन का इस्तेमाल करें)
      • जिन चीज़ों या खिलौनों की ज़रूरत न हो उनको अलग उठा कर या ढक कर रखें
      • बच्चे को खेल में तरह तरह की संवेदनाओं का अनुभव दें, जैसे आटा गूंदना, रेत से किला बनाना, दाने या कंकड़  गिनना, हाथ से रंग लगाना, मुलायम और खुरदरी चीज़ों से खेलना
      डर और चिंता की वजह से होने वाले तनाव
      क्या बच्चा कुछ साधारण चीज़ों से डर कर या नयी जगह जाने पर परेशान हो जाता है? अगर हाँ, तो:

      • बच्चे को किसी नयी या चिंताजनक स्थिति के लिए. पहले से, चित्र या वह जगह दिखा कर और समझा कर, तैयार करना
      • बच्चे को किसी नयी जगह से धीमे धीमे परिचित कराना, जैसे पहले सिर्फ बाहर से दिखा कर, फिर थोड़ा अंदर जा कर वहाँ पहले किसी एक से और फिर दूसरों से मिलाना
      • बच्चा जिस चीज़ से डरता हो उस से धीमे धीमे परिचित करना, जैसे पहले उस का फोटो या वीडियो दिखा कर और फिर थोड़ा दूर से दिखा कर
      • अगर बच्चा परेशान हो जाए तो उस का ध्यान बंटाना , जैसे उसे कोई ऐसी चीज़ देना जो उसे अच्छी लगती हो – कोई खिलौना या किताब
      • बच्चे को आराम करने के लिए समय देना
      परिवर्तन को सह पाने के लिए काम को अपेक्षित तरीके से करना
      क्या बच्चा स्थिति के बदलने की वजह से या किसी नए काम को शुरू करने पर परेशान हो जाता है? अगर हाँ, तो:

      • बच्चे को बदलाव के लिए पहले से तैयार करना
      • तस्वीरें दिखा कर समझायें
      • बदलाव को रोज़मर्रा के काम में शामिल करें
      • बच्चे को समझाने का तरीका बनायें कि पहले क्या होगा और उस के बाद क्या – इस काम में तस्वीरों (विज़ुअल टाईमटेबल) की मदद लें
      • एक काम से दूसरे काम में जाने के लिए बच्चे को समय दें, एक तरीका बनायें, जैसे पांच तक गिनती गिनना  या ताली बजाना और इस का अभ्यास करें जिस से बच्चा इस तरीके से जानकार हो जाए
      बच्चे का ध्यान बढ़ाना
      क्या बच्चा किसी बात या काम पर ध्यान नहीं दे पाता? क्या बच्चे ज़्यादा शारीरिक गतिविधि करता है? अगर हाँ, तो:

      • बच्चे के साथ तरह तरह के शारीरिक खेल खेलें, जैसे कूदना, दौड़ना, झूला झूलना, वजन उठाना, आदि
      • अगर बच्चा शारीरिक गतिविधि करना न चाहे तो उसकी पसंद के खेल, जैसे गेंद को फेंकना, लपकना से शुरुआत करें और इसका तरीका और समय बढायें
      • बच्चे का ध्यान स्थिर करने के लिए उसे ऐसे काम करायें  जिनमें वातावरण शांत हो और बच्चे को थोड़ी देर के लिए स्थिर बैठना हो, जैसे, उसे किताब पढ़ कर सुनायें। धीमे धीमे इस काम का समय बढायें और बच्चे की प्रशंसा कर उस की प्रेरणा बढ़ायें
      बच्चे को शांत होना सिखाना
      बच्चों के तनाव को कम करने के कुछ तरीके  बच्चे के साथ चित्त को शांत करने वाले काम करना:

      • धीमे धीमे 10 तक गिनना
      • पांच गहरी सांस लेना
      • संगीत सुनना
      • बच्चे को आराम करने के लिए कुछ समय और जगह देना
      • अगर बच्चा थका हुआ है, तो उसे आराम करने देना
  • क्या बच्चे पर किसी और वजह से, जैसे स्कूल मैं कोई परिवर्तन या उस से उसकी क्षमता से ज़्यादा काम करवाना, दबाव पड़ रहा है?
    • स्कूल से मिल कर इन वजहों को कम करें
  • क्या कोई और बच्चा या बड़ा आपके बच्चे को तंग कर रहा है?
    • इस स्थिति को बदलें
  • क्या घर पर या स्कूल में बच्चे की दिनचर्या में नियमित कार्यक्रम (रूटीन) की कमी है?
    • चित्रों की समय सारिणी (विज़ुअल टाईमटेबल) की मदद से बच्चे के लिए रूटीन बनायें
    • बच्चे को उसका रूटीन पालन करने में मदद करें
  • क्या बच्चे को भरपूर मानसिक प्रोत्साहन नहीं मिल रहा है?
    • बच्चे के साथ ऐसे खेल खेलें या ऐसे काम करें जिनमें उस की रुचि हो और जिन्हें वह आसानी से पूरा कर सके और जिनको पूरा करने से उसे प्रशंसा मिले
    • बच्चे को दिन भर बैठ कर टीवी या वीडियो न देखने दें, ऐसे कामों को और सक्रिय काम से पहले या बाद में करने का क्रम बनाकर बच्चे को प्रोत्साहित करें
    • बच्चे की दिनचर्या को उस के मनपसंद काम से शुरू करें
    • बच्चे के साथ रोज़ घर से बाहर घूमने या खेलने का एक रूटीन बनायें
    • बच्चे के मन से किसी निर्णय को लेने का वज़न कम करें
    • बच्चे को काम करने के लिए प्रेरित करें लेकिन इस अवस्था में उस पर से किसी काम को करने या न करने के निर्णय के वज़न को कम करें
  • क्या बच्चे को जितने सहारे की ज़रूरत है वह उसे मिल पा रहा है?
    • इस अवस्था में बच्चे को 1-1 मदद की ज़रूरत है; ऐसी मदद देने वाले से बच्चे के अच्छे और संवेदनशील सम्बन्ध होने चाहियें
  • क्या बच्चा कोई दवाई ले रहा है?
    • शटडाउन जैसी अवस्था किसी दवाई के खराब असर से अक्सर हो जाती है। डाक्टर की मदद ले कर दवाई की जांच करें और अगर ज़रूरत पड़े तो दवाई को रोकें या बदलें
  • क्या बच्चा अपने मानसिक तनाव को कम करने का कोई तरीका इस्तेमाल कर सकता है?
    • बच्चे की मानसिक तनाव को कम करने का तरीका सीखने और इस्तेमाल करने में मदद करें

 

4. आत्म-हानिकारक (ख़ुद को मारना) व्यवहार

कुछ बच्चे अपने आप को मारने, खरोंचने  या काटने लगते हैं, जिस से उनको नुकसान पहुँच सकता है और उन की  देखभाल करना मुश्किल हो जाता है। माता-पिता और शिक्षक अक्सर इस तरह के व्यवहार होने पर गलत तरीके से प्रतिक्रिया करते हैं, जिससे स्थिति और ख़राब हो जाती है।

 

आत्म-हानिकारक (ख़ुद को मारना) व्यवहार करने वाले बच्चे की मदद करना

  • क्या बच्चा निराश या व्यथित होने पर अक्सर ऐसा व्यवहार करता है?
    • वातावरण को बच्चे के लिए कम तनावपूर्ण करें (उपर लिखी तनाव कम करने की योजना को देखें)
  • क्या आपके बच्चे को संवाद करने, दूसरों को समझने या अपनी बात कहने में कठिनाई है?
    • बच्चे के संचार में सुधार करें
    • बच्चे को दूसरों से संवाद करने के तरीके जुटायें, जैसे इशारे का इस्तेमाल करना, चित्र का इस्तेमाल करना
    • बच्चे को इनका इस्तेमाल कर के अपनी ज़रूरत और भावनाओं को ज़ाहिर करना सिखायें
    • बच्चे को मदद मांगने का ऐसा तरीका सिखायें जिसे सभी समझते हों, इस का अभ्यास करें
    • बच्चे को आपकी बात समझने में मदद करें:
    • इशारों और चेहरे के भावों का इस्तेमाल करें
    • अपनी भाषा को बहुत सरल रखें,
    • अपनी बात को छोटे हिस्सों में बाटें
    • इशारों, तस्वीरों या चिन्हों का इस्तेमाल करें
  • क्या आपका बच्चा ऐसा व्यवहार उस समय ज़्यादा करते है जब वह किसी काम, जिसे वह पसंद नहीं करता, से बचना चाहता है?
    • बच्चे को उसकी ज़रूरतों और इच्छाओं, अपनी पसंदगी और नापसंदगी को बताने के तरीके सिखायें। बच्चे के शांत होने पर इन तरीकों का अभ्यास करें।
    • बच्चे को कोई और व्यवहार सिखायें, जैसे किसी गेंद को दबाना, खिलौने से खेलना, जिस का इस्तेमाल वह तब कर सके जब वह परेशान हो। बच्चे की इस व्यवहार को करने में मदद करें
    • सही तरीके या व्यवहार का इस्तेमाल करें पर बच्चे की प्रशंसा कर उस की प्रेरणा बढ़ायें
  • क्या आप का बच्चा ऐसा व्यवहार किसी तरह की संवेदना को पाने के लिए करता है?
    • बच्चे को और तरह से सम्वेदनायें देने का इंतज़ाम करें: ऐसे खिलौने और गतिविधियाँ जैसे छू कर या थपथपा कर संवेदना लेना, आवाज़ या संगीत का शुरू होना का इस्तेमाल करें
    • बच्चे को ऐसी चीज़ों के साथ खेलने के में मदद करें
  • क्या आपका बच्चा दूसरों का ध्यान अपनी ओर लेने के लिए ऐसा व्यवहार करता है?
    • बच्चे को किसी और व्यवहार पर बहुत ज़्यादा ध्यान देना शुरू करें और उसकी प्रशंसा करें
    • गलत व्यवहार पर ध्यान देना कम करें
  • बच्चों के अच्छे व्यवहारों को बढ़ा कर और उन्हें नये अच्छे व्यवहार सिखा कर आप उनके गलत व्यवहार के होने की सम्भावना कम कर सकते हैं

 

अपने आप को उत्तेजित करने के लिए बार बार दोहराये जाने वाले व्यवहार (स्टिमिंग)

 

ऑटिज़्म होने वाले बच्चे अक्सर कुछ दोहराए जाने व्यवहार करते हैं, जैसे बार बार उँगलियों या हाथ को हिलाना, अपने कान ढकना, बैठे हुए आगे-पीछे हिलना, पंजों के बल पर कूदना या इधर से उधर दौड़ना।

 

यह व्यवहार बच्चों में कई वजह से हो सकते हैं:

  1. यह बच्चे का अपने आप को शांत करने का एक तरीका हो सकता है
  2. यह बच्चे का अपने ध्यान को स्थिर करने का एक तरीका हो सकता है
  3. यह बच्चे की सिर्फ एक आदत हो सकती है

 

ऐसे व्यवहार चाहे देखने में अच्छे न लगें लेकिन बच्चे को कोई नुकसान नहीं पहुँचाते। इनको बिलकुल हटाने की कोशिश करना सिर्फ बच्चे को परेशान करना है लेकिन अगर यह व्यवहार बच्चे के औरों से मेलजोल या पढ़ने में बढ़ डालें तो आप कुछ तरीकों का इस्तेमाल कर के इन को कम कर सकते हैं:

 

  • बच्चे को शारीरिक गतिविधियाँ, जैसे खेल कूद, मज़ा लेते हुए खूब करें, इनको करने से दोहराए जाने वाले व्यवहार कम होंगे
  • इन व्यवहारों की वजह से अपने बच्चे के साथ किसी भी काम को करना कम न करें; इन को अनदेखा करते हुए स्थिति को सामान्य बनाने की कोशिश करें
  • बच्चे के ऐसे व्यवहार करते समय उस पर गुस्सा न हों और चिल्लायें नहीं, उस की ओर प्यार से देखें और उस के साथ मज़ा लेने वाले काम करने की कोशिश करें
  • बच्चे को अपने पर नियंत्रण करना सिखायें: आप ऐसा अपने कमरे में करो, या, आप ऐसा इस काम को करने के बाद करना
  • जब बच्चा दोहराने वाले व्यवहार न कर रहा हो तो उसकी प्रशंसा करें “आप कितने अच्छे हो, अभी हाथ नहीं हिला रहे हो”